आवारा मन असाधारण होता है …

आवारा हूँ – इन शब्दों को केन्द्र में रखकर गीतकार शैलेन्द्र और गायक मुकेश ने मानव मन को दार्शनिक अंदाज में प्रस्तुत किया है। साधारण मन के लिए तो इस गीत में मनोरंजन से अधिक कुछ भी नहीं, पर इस नजरिए से भी यह गीत अत्यन्त मधुर एहसास देता है।

आवारा मन असाधारण होता है … Read More »