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मदिरालय! House of wine.

मदिरालय! इस शब्द का विश्लेषण करें तो इसके अर्थ और भाव में भिन्नता है। यह शब्द ‘मदिरा’ और ‘आलय’ दो शब्दों का मेल है। ‘मदिरा’ एक मादकता युक्त तरल पदार्थ है। और ‘आलय’ स्थान विशेष का सुचक है। जहां मदिरा पीने-पिलाने की व्यवस्था हो, उस स्थान विशेष को मदिरालय कहा जाता है। लेकिन यह जो […]

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सफर और वंदगी का जीवन में महत्व..!

सफर और वंदगी दो अलग-अलग शब्द हैं, जो भिन्न अर्थों को दर्शाते हैं। जो सफर करता है, वह मुसाफिर कहलाता है, यात्री कहलाता है। वह एक स्थान से दूसरे स्थान तक आया-जाया करता है। यात्रा के विभिन्न उद्देश्य होते हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए यह कार्य किया जाता है। वंदगी का समानार्थी शब्द है

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मन का आपा खोय …

मन का आपा खोय – इस ऊक्ति का आशय है मन को अहंकार से मुक्त करना। यह उक्ति एक कबीर वाणी का अंश है। ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोय।औरन को शीतल करे आपहूं शीतल होय।। ऐसी वाणी बोलिए !  जो सुनने में मधुर लगे, जिससे किसी को कोई कष्ट ना पहुंचे। वाणी एक

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आप भला तो जग भला ..!

आप भला तो जग भला! इस पद का का अर्थ है, अपने आप में जो अच्छा है, भला है, उसे सब अच्छा लगता है, सभी लोग अच्छे लगते हैं, समस्त संसार उसे अच्छा जान पड़ता है। अब प्रश्न है कि बुरा कौन है ? तो इसका सरल उत्तर यही है कि जो अच्छा नहीं है।

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लोग क्या कहेंगे ..!

लोग क्या कहेंगे..! भाई, अच्छा या बुरा कुछ तो लोग कहेंगे ही! लोग या तो आपकी निंदा करेंगे या प्रशंसा करेंगे। या तो आपको उत्साहित करेंगे या हतोत्साहित करेंगे। जो भी करेंगे या तो अपने मतलब के हिसाब से करेंगे या फिर अपने समझ के हिसाब से करेंगे। लोग क्या कहेंगे! एक अधोगामी, संशयात्मक सोच

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असतो मा सद्गमय — Asato Ma Sadgamaya

असतो मा सद्गमय – उपनिषद का यह मंत्र जीवन में प्रगति के लिए अत्यंत विशिष्ठ है। जीवन में सफल होने के लिए मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का होना महत्त्वपूर्ण है। यह मंत्र हमें इस बात का स्मरण कराता है। हमें सचेत करता है कि हम जो भी कर रहे हैं, हमसे जो भी

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सत्यम शिवम सुंदरम …

ईश्वर सत्य है , सत्य ही शिव है, शिव ही सुन्दर है! जागो उठकर देखो जीवन ज्योत उजागर है ..! सत्यम शिवम सुंदरम ..! अर्थपूर्ण शब्दों एवम् मधुर सुर-संगीत से सुसज्जित यह गीत अत्यंत मनमोहक है। गीतकार पं नरेन्द्र शर्मा के इन पंक्तियों को स्वर दिया है स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने। और संगीत से

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ऐसी वाणी बोलिए …

ऐसी वाणी बोलिये मन का आपा खोय। औरन को शीतल करै आपहूं शीतल होय।। उक्त दोहा संत कबीरदास जी की वाणी है। दोहे का भावार्थ है! मीठे बोल यानि वाणी की मधुरता सुनने वाले एवम् बोलने वाले दोनों के मन को शांत करती है। परन्तु मीठे बोल बोलना सभी संभव हो पाता है, जब मन

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जाकी रही भावना जैसी — Jaki Rahi Bhavna Jaisi

भावना क्या है ? यह मनोभाव है, मन में उत्पन्न होने वाले विचार। यह सकारात्मक भी होता है और नकारात्मक भी होता है। किसी विषय पर अस्पष्ट भी हो सकता है और स्थिर भी हो सकता है। जो जैसा सोचता है, जैसी भावना करता है, जैसा होना चाहता है, वैसा ही हो जाता है। भावना

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आप भला तो जग भला — Aap Bhala To Jag Bhala

आप भला तो जग भला! इस पद का का अर्थ है, अपने आप में जो अच्छा है, भला है, उसे सब अच्छा लगता है, सभी लोग अच्छे लगते हैं, समस्त संसार उसे अच्छा जान पड़ता है। अब प्रश्न है कि बुरा कौन है ? तो इसका सरल उत्तर यही है कि जो अच्छा नहीं है।

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देनहार कोऊ और है — Denhar Kou Aur Hai

देनहार कोऊ और है! अर्थात् देनेवाला कोई और है, हम अगर किसी को कुछ देते हैं तो केवल चीजों को हस्तांतरित करते हैं। देनहार हम नहीं होते, अगर ऐसा कोई समझता है तो यह उसकी नासमझी है। देनहार! अर्थात् दाता, सरल तरीके से कहें तो इस शब्द का अर्थ है देनेवाला! जब कोई किसी को

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