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सम्मान, अभिमान और स्वाभिमान का अर्थ

जब किसी कारणवश आपके सम्मान को ठेस लगे तो आप खुद को अपमानित महसूस करते हो। हर किसी को सम्मान चाहिए! यह भावना सबों में प्रबल होती है।

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चरित्र का निर्माण जरूरी क्यों है —

चरित्र उन सारे प्रवृतियों का योग है, जो व्यक्ति में होती है। यह व्यक्ति के दृष्टिकोणों और व्यवहार के तरीकों का पूर्ण मिश्रण है। मनुष्य अपनी इन्द्रियों को जिस तरह से व्यवहार में लाता है, इन सभी क्रियाओं का समष्टि है चरित्र। यह किसी व्यक्ति की विश्वास, मूल्य, सोच-विचार और व्यक्तित्व का मेल होता है।

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स्वभाव का अर्थ — Meaning of Behavior

हमारा स्वभाव कैसा होना चाहिए ! जैसा हम सोच रहे होते है, वैसा ही हमारा स्वभाव होता है। साधारण मनुष्य  प्रायः दुसरों के क्रिया-कलाप को देखता रहता है। बहिर्मुखी प्रवृत्ति के कारण वह दूसरों के गुण और अवगुण सब देखता है, परंतु दूसरों के गुणों पर ध्यान ना देकर अवगुणों पर ज्यादा ध्यान देता है।

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आत्मविश्वास क्या है? — What Is Self Confidence?

शक्ति के विश्वास में ही शक्ति है। हमारी मानसिक शक्तियां हमारे आत्मविश्वास पर टिकी होती हैं। वास्तव में आत्मविश्वास एक आध्यात्मिक ऊर्जा है। आत्मविश्वास जैसा दुसरा कोई मित्र नहीं। जीवन में सफलता के लिए आत्मविश्वास का होना उतना ही जरुरी है, जितना मछली के लिए पानी का। आत्मविश्वास सफलता का पहला सीढ़ी है। जीवन में

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प्रतिस्पर्धा का अर्थ क्या है? — What Does Competition Mean?

प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वन्दता में अन्तर है ! प्रतिस्पर्धा यानि प्रतियोगिता एक प्रक्रिया है। ऐसी प्रक्रिया जब दो अथवा दो से अधिक व्यक्ति या समूह किसी उद्देश्य की प्राप्ति हेतु प्रयत्नशील होते हैं। किसी भी कार्य में आगे निकलने की चेष्टा हमें प्रतिस्पर्धा की ओर ले जाती है। सफलता के दौड़ में प्रतिस्पर्धा का होना आनिवार्य

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जिन्दगी के सफर में — In the Journey of Life

जिन्दगी के सफर अनिश्चितताओं से भरे होते है। साथियों ! जिन्दगी के सफर में लोग मिलते हैं बिछड़ते है! सांसारिक मोह के प्रभाव में हमारा मन सुख-दुख, हर्ष-विषाद के भावनाओं से प्रभावित होता रहता है। भावनारूपी समुद्र में जब लहरें उठती हैं तो इस उफान का कोई ओर छोर नहीं होता। ऊपर से स्थिर लगने

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धैर्य रखना जरूरी क्यों है —

धैर्य रखना जरूरी क्यों है? यह जानने से पहले यह विचार करना होगा कि धैर्य क्या है? एक सोच, एक विचार या एक अवधारणा! आइए जानने का प्रयास करते हैं कि धैर्य क्या है? धैर्य पर विचार जरूरी है! धैर्य या धीरज का आशय है कि जहां हम हैं, जिस स्थिति में हैं, अगर वह

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व्यवहार कुशल होना जरुरी क्यों है…

व्यवहार एक मान्सिक प्रवृत्ति है, मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति है। यह ऐसी क्रिया है जो किसी मनुष्य के द्वारा किया जाता है। वह प्रक्रिया है जो हम दुसरों के लिए काम में लाते हैं। विभिन्न परिस्थितियों में दुसरों के द्वारा हम पर जो क्रियात्मक पहल होती है

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विश्वास का होना जरूरी क्यों है —

जीवन में विश्वास जरूरी है। यह बात बिल्कुल सही है, क्योंकि विश्वास के बगैर जिया नहीं जा सकता है। संदिग्ध विचारों के साथ हम सकारात्मक नहीं रह सकते। परन्तु हर किसी के साथ विश्वास किया भी तो नहीं जा सकता! कारण कि जहाँ विश्वास होता है, वहीं विश्वासघात भी होता है।

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आवारा मन असाधारण होता है …

आवारा हूँ – इन शब्दों को केन्द्र में रखकर गीतकार शैलेन्द्र और गायक मुकेश ने मानव मन को दार्शनिक अंदाज में प्रस्तुत किया है। साधारण मन के लिए तो इस गीत में मनोरंजन से अधिक कुछ भी नहीं, पर इस नजरिए से भी यह गीत अत्यन्त मधुर एहसास देता है।

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