Adhyatmpedia

Most Read

देख-भाल का अर्थ क्या है?

सामान्यतः देख-भाल का आशय किसी का ख्याल रखना समझा जाता है। देख एक क्रियात्मक शब्द है। देख का आशय किसी को देखने, निहारने की क्रिया से है। एक शब्द है संभाल, जिसका अर्थ है सहेज कर रखना। संभाल में भाल शब्द जुड़ा हुआ है, भाल के साथ सम उपसर्ग लगा हुवा है। सम का आशय […]

देख-भाल का अर्थ क्या है? Read More »

ज्ञानी भुगते ज्ञान से ।।

देह धरे का दंड है, सब काहु को होय।ज्ञानी भुगते ज्ञान से, अज्ञानी भुगते रोय।‌। कबीर के उक्त दोहे का शाब्दिक अर्थ है कि देह धारण करने का दंड हर किसी को भोगना पड़ता है। परन्तु ज्ञानी इसे ज्ञान से भोगते हैं और अज्ञानी रोते-चिल्लाते हुवे भोगते हैं।  देह धरे का आशय जन्म लेने से

ज्ञानी भुगते ज्ञान से ।। Read More »

अति भला न बोलना..!

अति का आशय है जरूरत से ज्यादा, आवश्यकता से अधिक। जितना जरुरी है, उससे अधिक अधिक घटित होना अति है। जरुरत से ज्यादा कभी भी, कुछ भी अच्छा नहीं होता। यह बात हरेक कार्य-व्यवहार, घटनाक्रम पर लागु होता है। अति का परिणाम हमेशा दुखदाई होता है।  यह शब्द हमें संयमित जीवन जीने को सचेत करता

अति भला न बोलना..! Read More »

एकै साधे सब सधै

एकै साधे सब सधै, सब साधे सब जाय।रहिमन मूलहिं सीचिबो, फूलै फलै अघाय।। उक्त दोहा कवि रहीम का है। दोहे का शाब्दिक अर्थ है- एक कार्य को पूरा करो तो बाकि सभी कार्य पूरे हो जाते हैं। और एक साथ अनेक कार्यों में लगे रहने से कोई भी कार्य सही ढंग से पूरा नहीं हो

एकै साधे सब सधै Read More »

एकाग्रता का अर्थ!

सांसारिक जीवन में भी मन की एकाग्रता महत्वपूर्ण है। परन्तु यह व्यक्तिगत प्रयास और प्रयास की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। जो किसी वांछित चीज को पाने का पुरे मन से प्रयास करते हैं, उसे पा भी लेते हैं।

एकाग्रता का अर्थ! Read More »

व्यक्ति और व्यक्तित्व!

व्यक्ति का शाब्दिक अर्थ है, जो व्यक्त होता हो। जिसके पास व्यक्त होने के लिए बुद्धि, विचार, व्यवहार जैसी कुछ विशेषताएं हों। व्यक्ति से जो व्यक्त होता है, उसी से उसके व्यक्तित्व का निर्माण होता है।

व्यक्ति और व्यक्तित्व! Read More »

जीवन असत्य है ..!

जीवन असत्य है, यह समझने का विषय है। जीवन का सच क्या है? यह जो सवाल है, अनेकों सवालों को खुद में समेटे हुए है। लेकिन साधारण मनुष्य के पास इन सवालों का जबाब नहीं है।

जीवन असत्य है ..! Read More »

भट्ट ब्राह्मण कैसे..?

भट्ट ब्राह्मण कैसे? यह जो प्रश्न है, जातिवाचक है, भट्ट शब्द पर है। यह पूछता है कि भट्ट क्या है? ब्राह्मण है या कुछ और? और यह भी पूछता है कि अगर भट्ट ब्राह्मण नहीं है, तो क्या है? इसका जबाव शायद उनके पास भी नहीं है, जो भट्ट को ब्राह्मण नहीं मानते।  आखिर यह

भट्ट ब्राह्मण कैसे..? Read More »

ब्रम्ह मुहूर्त एवम् संध्याकाल।।

जागृत होने के लिए, ध्यान, साधना के लिए जो उपयुक्त बेला है, ब्रम्ह मुहूर्त है। और ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने का समय संध्याकाल है।

ब्रम्ह मुहूर्त एवम् संध्याकाल।। Read More »

जागने का मुहूर्त क्या है?

जीवन को किसी विशिष्ट दिशा की ओर अग्रसर करना हो, तो विशेष प्रक्रियाओं का अभ्यास जरूरी हो जाता है। इसके लिए जागने का मुहूर्त भी विशेष हो जाता है।

जागने का मुहूर्त क्या है? Read More »