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राही वही कहलाता है !

जिसे राह में चलना आता है ! रे मन राही वही कहलाता है !! जीवन में परेशानियां आती हैं। परेशानियों से पार पाने का उपाय ढ़ुढ़ना पड़ता है। चिंता करने से छुटकारा नहीं मिलता, और बढ़ जाता है। कभी ऐसा भी होता है कि ये विकराल रूप धारण कर लेती हैं। इन परिस्थितियों में शान्तचित्त

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उम्मीद पर कविता

उम्मीद हूं मैं न छोड़ना मुझे ! उम्मीद हूं मैं न छोड़ना मुझेलेकर सहारा उन्नत विचारों काभीतर किसी कोने में हमेशामन रे! सहेजकर रखना मुझे ! गर मिलेगी रोशनी तोमिलेगी मेंरे जलने से हीबुझा दोगे अगर तो कैसेदुर करोगे अंधेरे को कभीदीया हूं मैं एक अकेलामन रे! जलाये रखना मुझे! दर्द का दरिया हो अगरया

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जुगनू पर कविता : poem on firefly.

जुगनू की रोशनी से जुगनू की रोशनी सेघोर अंधेरी रात कीकालिमा तो नहीं मिटतीपर इस टिमटिमातीरोशनी को गर देखेंतो उजाले की होने कीआस भी नहीं मिटती उड़ते फिरते हैं वोघोर अंधेरी रातों मेंजिधर भी वो विचरत्ते हैंपल भर के लिए ही सहीपर मिटा देते हैंआसपास की कालिमा कोऔर कराते हैं ये एहसासकि उजाला अभी मिटा

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नशा हो अगर तो ऐसा हो !

प्रिय एवम् श्रद्धेय पाठकगण नशा हो तो ऐसा हो ! इस कविता के द्वारा मेंरे काव्य-यात्रा की शुरुआत हो रही है। नशा यानी मदहोश होने की अवस्था। ऐसा व्यसन, जिससे किसी न किसी रूप में सभी ग्रस्त हैं। कुछ ऐसी वस्तुएं हैं, जिनमें मादकता होती हैं। सामान्यतः ऐसा समझा जाता है कि उन चीज़ों का

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पूजा का अर्थ ! Meaning of worship in hindi.

पूजा का अर्थ क्या है? इस प्रश्न का सटीक उत्तर देना अत्यंत कठिन है। वो इसलिए की सबकी धारणाएं इस विषय पर एक नहीं होती। यह श्रद्धा और विश्वास का विषय है। यह स्वयं के अनुभव का विषय है। पूजा-अर्चना, आराधना जैसी पावन शब्दों का अर्थ अनुभव से ही जाना जा सकता है। फिर भी

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चैत्र नवरात्र का महत्व —

हिन्दू धर्मावलंबियों में वर्ष में दो बार नवरात्र का पर्व मनाने की परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है। एक आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक, जिसे शारदिय नवरात्र कहा जाता है। और दुसरा चैत्र शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक, जिसे चैत्र नवरात्र कहा जाता है। दोनों ही

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असतो मा सद्गमय — Asato Ma Sadgamaya

असतो मा सद्गमय – उपनिषद का यह मंत्र जीवन में प्रगति के लिए अत्यंत विशिष्ठ है। जीवन में सफल होने के लिए मन की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का होना महत्त्वपूर्ण है। यह मंत्र हमें इस बात का स्मरण कराता है। हमें सचेत करता है कि हम जो भी कर रहे हैं, हमसे जो भी

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खाली दिमाग शैतान का घर …

‘खाली दिमाग’ का तात्पर्य है मस्तिष्क का विचार शुन्य हो जाना। परन्तु यह जो दिमाग है, क्या कभी खाली हो सकता है ? दिमाग कभी खाली नहीं होता! मनुष्य के मस्तिष्क में हमेशा कुछ न कुछ चलता रहता है। तो फिर खाली दिमाग का तात्पर्य क्या है ?  एक लोकोक्ति है कि ‘खाली दिमाग शैतान

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संकल्पशक्ति क्या है …

संकल्पशक्ति का आशय है, श्रेष्ठ विचार को क्रियान्वित करने की शक्ति। संकल्प एक क्रियाशील चरित्र है। अगर कोई अपना सबकुछ अपने उद्देश्य के लिए दांव पर लगाने के लिए तत्पर हो, तो वह उसे प्राप्त कर लेता है। संकल्प अगर दृढ़ हो तो मुश्किलें दृढ़ नहीं हो सकती। कुछ पाने की इच्छा रखना और उसे

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मन दर्पण कहलाए — Man Darpan Kahlaye

मन दर्पण कहलाए ! अर्थात् मन दर्पण कहलाता है। पर मन और दर्पण दोनों में बुनियादी भिन्नता है, फिर यह समानार्थी कैसे हो सकते हैं! दर्पण एक वस्तु है, जिसे हम देख सकते हैं, स्पर्श कर सकते हैं। परन्तु मन तो अदृश्य है, इसे हम स्पर्श भी नहीं कर सकते। मन का तो केवल अनुभव

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