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जाकी रही भावना जैसी — Jaki Rahi Bhavna Jaisi

भावना क्या है ? यह मनोभाव है, मन में उत्पन्न होने वाले विचार। यह सकारात्मक भी होता है और नकारात्मक भी होता है। किसी विषय पर अस्पष्ट भी हो सकता है और स्थिर भी हो सकता है। जो जैसा सोचता है, जैसी भावना करता है, जैसा होना चाहता है, वैसा ही हो जाता है। भावना […]

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आप भला तो जग भला — Aap Bhala To Jag Bhala

आप भला तो जग भला! इस पद का का अर्थ है, अपने आप में जो अच्छा है, भला है, उसे सब अच्छा लगता है, सभी लोग अच्छे लगते हैं, समस्त संसार उसे अच्छा जान पड़ता है। अब प्रश्न है कि बुरा कौन है ? तो इसका सरल उत्तर यही है कि जो अच्छा नहीं है।

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श्रीमद्भागवत गीता पर विचार

अर्जुन के प्रश्न और श्रीकृष्ण के उपदेशों को श्रीमद्भागवत गीता नामक ग्रन्थ में संकलित किया गया है। यह मानव मात्र का ग्रन्थ है! एक ऐसा ग्रन्थ है, जिसमें मानवमात्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया गया है। पौराणिक भारतीय शास्त्रों में श्रीमद्भागवत गीता का स्थान वही है, जो उपनिषद एवम् धर्मसूत्रों को प्राप्त है। गीता

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देनहार कोऊ और है — Denhar Kou Aur Hai

देनहार कोऊ और है! अर्थात् देनेवाला कोई और है, हम अगर किसी को कुछ देते हैं तो केवल चीजों को हस्तांतरित करते हैं। देनहार हम नहीं होते, अगर ऐसा कोई समझता है तो यह उसकी नासमझी है। देनहार! अर्थात् दाता, सरल तरीके से कहें तो इस शब्द का अर्थ है देनेवाला! जब कोई किसी को

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सकली तोमारी इच्छा — Sakali Tomari Ichchha

‘सकली तुमारी इच्छा’ यह बंगला भाषा के एक वाक्यांश ‘সকলি তোমারি ইচ্ছা’ का हिन्दी रुपांतरण है। इसका शाब्दिक अर्थ है ‘सबकुछ तुम्हारी इच्छा से है’ , ‘everything happens as you wish।’ अब आइए! जानने का प्रयत्न करते हैं कि इस वाक्यांश का निहितार्थ क्या है?  “सकली तुमारी इच्छा, इच्छामयी तारा तुमी! तुमार कर्मों तुमी कोरो

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इच्छा का अर्थ — Meaning of Desire

इच्छा का अर्थ क्या है? इस प्रश्न का उतर है, किसी चीज को पाने की ओर मन की प्रवृति !  यह एक मनोवृति है, जिसे आकांक्षा, अभिलाषा, लालसा, कामना आदि नामों से भी जाना जाता है। सामान्यतः प्रत्येक व्यक्ति सुख-सुविधाओं के साथ जीना चाहता है। सुख, सफलता एवम् समृद्धि की लालसा प्रत्येक के मन में

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सुख और दुख क्या है? — What is Happiness and Sorrow?

प्रिय बन्धुगण ; इस आलेख में इस बात पर विचार किया जा रहा है कि वास्तव में सुख और दुख क्या है ? सामान्य मनुष्य का सारा जीवन इन्हीं दो स्थितियों में क्यों उलझा रहता है ? ज्ञानीजनों के अनुसार सुख और दुख  मन की अवस्थाएं हैं! जिनका अनुभव मन के कारण ही होता है,

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मनोबल का अर्थ — Meaning of Morale

मनोबल का तात्पर्य मन की शक्ति से है ! यह एक ऐसी ऊर्जा है, जो असिमित होती है। मन की तीव्रता और असिमिता की भांति मनोबल की भी कोई सीमा नहीं होती। मन से ही विचार उत्पन्न होते हैं और विचारों से ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है। यह समस्त  गुणों-अवगुणों के संदर्भ में मन

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अहंकार का अर्थ — Meaning of Ego

अहंकार मन का एक भाव है!  ऐसा भाव है, जिसे व्यक्ति स्वयं धारण करता है। अहंकार के कारण मन को यह आभास होता है कि सब-कुछ करनेवाला वही है। यह अहम् और कार दो शब्दों का मेंल है। अहम् अर्थात् मैं और कार से तात्पर्य है करने वाला। जब कोई व्यक्ति किसी विषय-वस्तु, कार्य  एवम्

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दान का अर्थ और महत्व — Meaning and Importance of Charity

दान का शाब्दिक अर्थ देने की क्रिया से है! सामान्यतः किसी को सहायता के रुप में कुछ देना दान समझा जाता है। गहन अर्थों में किसी वस्तु अथवा अर्थ पर से स्वयं का अधिकार समाप्त करके दुसरे का अधिकार स्थापित कर देना दान है। इस क्रिया में दी गई वस्तु को किसी भी स्थिति में

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कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर।।

हमारे जीवन में अनेक कार्य ऐसे होते हैं, जो नियत समय पर ही पूर्ण होते हैं, समय से पूर्व किसी को कुछ भी प्राप्त नहीं होता।

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