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लगन और परिश्रम पर विचार जरुरी है।।

लगन और परिश्रम: सफलता की कुंजी।।

लगन में समर्पण और निष्ठा का भाव निहित होता है, और परिश्रम में निरंतरता का समावेश है। लगन में रुचि है, उत्साह है, और परिश्रम स्वनिर्मित संघर्ष है। लगन और परिश्रम के द्वारा हम असफलता को परास्त करने की कला सीखते हैं।

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अपना ब्लॉग वेबसाइट कैसे बनाएं।।

ब्लॉग वेबसाइट को संचालित करने के दो तरीके हैं। एक subdomain बनाकर, जो free service है। और दुसरा तरीका है, अपने ब्लॉग के लिए एक domain name और hosting खरीदना पड़ता है।

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असफलता एक चुनौती।।

असफल होने के कारणों को खोजकर, प्राप्त अनुभवों से सीख लेते हुए, सफलता को आवाहन देकर, पुनः कार्य में प्रवृत्त होना जरूरी है। असफलता एक चुनौती है, इस बात का यही आशय है।

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Safalta ke mantra

सफलता के मंत्र

मंत्र अनुभव जनित होते हैं, जो हमेशा सकारात्मक परिणाम देते हैं। सफलता के मंत्र सफल होने के उपाय हैं, इन मंत्रों पर अमल करने से सफलता अवश्य प्राप्त होती है।

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Online earning kaise karen

ऑनलाइन अर्निंग कैसे करें …

जीवन में ज्ञान का होना महत्वपूर्ण है, और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना भी जरूरी है। आज के समय में earning के लिए online methods उपलब्ध हैं। इस विषय में जानकारी प्राप्त करना सबके लिए जरूरी है।

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Manjil ka arth

मंजिल का अर्थ

मंजिल शब्द का कई अर्थों में उपयोग किया जाता है। लेकिन इसका मूल अर्थ एक गंतव्य, उद्देश्य या लक्ष्य को दर्शाना होता है, जिसे किसी व्यक्ति या समूह द्वारा प्राप्त करने का प्रयत्न किया जाता है।

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भेदभाव : एक वैचारिक विपन्नता।

भेदभाव, अर्थात् भेद की भावना। यह एक ऐसा शब्द है, जो विभिन्न विषयों में प्रयुक्त होता है। ऊंच-नीच, छुवाछुत आदि के भाव इसमें संलग्न होते हैं। जो किसी व्यक्ति या समूह के साथ वर्ग, जाति, धर्म, लिंग आदि के कारण उनके साथ भिन्नता का विचार उत्पन्न करता है। भेदभाव विभिन्न कारणों से वैचारिक भिन्नता के

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पेनिक डिसऑर्डर को नियंत्रित कैसे करें!!

पेनिक डिसऑर्डर (penic disorder) एक मनोविकार है, जिसमें अचानक अधिक चिंता या घबराहट की अवस्था हो जाती है। जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं का आना जाना लगा रहता है। उपस्थित परेशानियां किसी किसी को अत्यधिक चिंताग्रस्त कर देती है। अगर लम्बे समय तक भय एवम् चिंता का भाव बना रहे तो व्यक्ति अवसादग्रस्त हो

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एक शिक्षक की संवेदना

मित्रों नमस्कार, इस आलेख में एक शिक्षक की संवेदना का उल्लेख किया जा रहा है। आज के समय में भी ऐसे शिक्षक हैं, जो संवेदनशील होते हैं। ऐसे ही एक शिक्षक हैं श्री भालचंद्र पाण्डेय, जो उत्तर प्रदेश के बलिया प्रक्षेत्र के रहनेवाले हैं। “पहले पेट भरना सीख लो, फिर जो चाहे करो”, विद्यार्थियों के

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प्रभाते कर दर्शनम् …. प्रातःकालीन मंत्र।

प्रभाते कर दर्शनम् – यह एक मंत्र का अंश है, जिसमें तीन शब्द हैं। पहला है प्रभात यानि सुबह की बेला, दुसरा है कर यानि हथेली और तीसरा है दर्शन। यहां दर्शन का आशय देखने से है। सुबह की जो बेला है, हम नींद से जगते हैं। जब हम नींद में होते हैं, हमारी पलकें

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