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मन पर विचार जरूरी है — Man Par Vichar Jaruri Hai

मन पर विचार जरुरी है ! पर मन पर विचार कैसे करें! सब तो मन के ही विचार हैं। पर मन पर विचार करने के लिए भी मन की जरूरत है। यह प्राय: सबको अनुभव होता है कि उसके पास मन है। मन मनुष्य के पास उपलब्ध एक बहुत बड़ी शक्ति है। शब्द विवेचना करें, […]

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मदहोशी का अर्थ — Madhosi Ka Arth

मदहोशी का अर्थ है होश में नहीं होना। अब जरा सोचिए कि ‘होश में होने’ का क्या मतलब है ? सामान्यतः जब कोई नशे में हो अथवा क्रोध में हो तो यह समझा जाता है कि वह होश में नहीं है। अर्थात् मदहोशी की अवस्था शरीर एवम् मन दोनों को प्रभावित करता है। परन्तु गहराई

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इन्दीवर बायोग्राफी इन हिन्दी –

भारतीय सिनेमा जगत में कुछ ऐसे गीतकार हुवे हैं, जिनके गीतों में उत्कृष्ट काव्य की झलक मिलती है। उन्हीं गीतकारों में से एक हुवे श्यायलाल बाबु राय, जिन्हें इन्दीवर के नाम से जाना जाता है। जिनके गीतों में ऋंगार रस की मधुरता भी है और जीवन दर्शन भी छिपा हुआ है। 1 जनवरी 1924 को झांसी

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सत्यम शिवम सुंदरम …

ईश्वर सत्य है , सत्य ही शिव है, शिव ही सुन्दर है! जागो उठकर देखो जीवन ज्योत उजागर है ..! सत्यम शिवम सुंदरम ..! अर्थपूर्ण शब्दों एवम् मधुर सुर-संगीत से सुसज्जित यह गीत अत्यंत मनमोहक है। गीतकार पं नरेन्द्र शर्मा के इन पंक्तियों को स्वर दिया है स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने। और संगीत से

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माया का संसार — World of Illusion

माया क्या है ? इस शब्द को परिभाषित करना कठिन है। यह एक ऐसा शब्द है, जिसका प्रयोग अनेक अर्थों में होता है। भ्रम, सम्मोहन, मन की कल्पना आदि इसके अनेक रूप हैं। कोई व्यक्ति अपनी चतुराई से किसी वस्तु को मिश्र-भिन्न स्वरुप में दिखाता है, इसे हम जादु अथवा तिलिस्म की संज्ञा देते हैं।

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नेकी कर दरिया में डाल —

नेकी कर दरिया में डाल’ यह एक बहुप्रचलित मुहावरा है। जिसका सीधा और सरल अर्थ है, दुसरों की नेकी करो और भूल जाओ। भलाई, उपकार आदि नेकी का समानार्थी शब्द हैं। इसका विपरीत है बदी! बद यानि बुरा, जो अच्छा नहीं है। बद से बना है बदी, बुराई, अपकार आदि इसके समानार्थी शब्द हैं। किसी

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लता मंगेशकर — मेरी आवाज ही मेरी पहचान है

लता मंगेशकर! गीत-संगीत की दुनिया के आसमान का एक चमकता हुआ ध्रुव तारा। स्वर कोकिला, स्वर साम्राज्ञी, जिन्हें लोग श्रद्धा पूर्वक लता दीदी कहकर पुकारते हैं। इस भारत कोकिला की सुरमयी स्वर और सौम्य स्वभाव ने करोड़ों लोगों के मन को मोह लिया है। उनकी जादूई आवाज  से सुशोभित गीतों को समस्त संसार में पसंद

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संदेह और श्रद्धा — Doubt and Faith

संदेह मन की दुविधा जनक स्थिति है! किसी वस्तु अथवा विषय के संबंध में वास्तविक ज्ञान का न होना इस मनोभाव के उपस्थित होने का कारण है। अल्पज्ञान की धुंध में हमें चीजें उनके सही स्वरुप में दिखाई नहीं पड़ती। फलस्वरूप हमारा मन उन चीजों के प्रति कोई स्पष्ट विचार नहीं बना पाता है।  जब

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श्रद्धा का अर्थ और महत्व — Meaning and Importance of Faith

श्रद्धा क्या है..? यह एक विचारणीय प्रश्न है! यह एक प्रकार का मनोभाव है। और मनोवृत्तियों की व्याखया करना सहज तो नहीं है। फिर भी शब्द है तो अर्थ भी होगा ही। अध्ययन के आधार पर इस शब्द की मीमांसा तो किया ही जा सकता है। ‘श्रत्’ एवम् ‘धा’ का योग है श्रद्धा। श्रत् अर्थात्

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ऐसी वाणी बोलिए …

ऐसी वाणी बोलिये मन का आपा खोय। औरन को शीतल करै आपहूं शीतल होय।। उक्त दोहा संत कबीरदास जी की वाणी है। दोहे का भावार्थ है! मीठे बोल यानि वाणी की मधुरता सुनने वाले एवम् बोलने वाले दोनों के मन को शांत करती है। परन्तु मीठे बोल बोलना सभी संभव हो पाता है, जब मन

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सोच को बदलो — Change The Way You Think

सोच क्या है ? सोच एक मनोभाव है! और सोचना एक क्रिया। यह किसी विषय पर विचार करने की प्रवृत्ति है। महत्त्वपूर्ण यह है कि हम सोचते क्या हैं ?  किसी विषय-वस्तु पर हमारा विचार करने का भाव कैसा है ? क्योंकि हम जैसा सोचते हैं वैसा ही करते हैं। महत्त्वपूर्ण है सोच की दिशा

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