ऐसी लागी लगन ..!
मीरा की लगन ऐसी ही थी, उनकी मन की लहरें प्रेम के सागर में मिलने को उमड़ पड़ी। आत्मा जब परमात्मा से साक्षात्कार के लिए तड़प उठती है, तो ऐसा ही कुछ घटित होता है। जैसा कि मीरा के जीवन में घटित हुवा था।
मीरा की लगन ऐसी ही थी, उनकी मन की लहरें प्रेम के सागर में मिलने को उमड़ पड़ी। आत्मा जब परमात्मा से साक्षात्कार के लिए तड़प उठती है, तो ऐसा ही कुछ घटित होता है। जैसा कि मीरा के जीवन में घटित हुवा था।
जागृत होने के लिए, ध्यान, साधना के लिए जो उपयुक्त बेला है, ब्रम्ह मुहूर्त है। और ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने का समय संध्याकाल है।
ब्रम्ह मुहूर्त एवम् संध्याकाल।। Read More »
जीवन को किसी विशिष्ट दिशा की ओर अग्रसर करना हो, तो विशेष प्रक्रियाओं का अभ्यास जरूरी हो जाता है। इसके लिए जागने का मुहूर्त भी विशेष हो जाता है।
जागने का मुहूर्त क्या है? Read More »
भक्ति की शक्ति परम सुखदायी, करो स्वीकार इस पावन त्तत्व को। सुख के इस धारा का अनुभव कर, सार्थक करो निज जीवन को …
दुख में सुमिरन करने से हम अपने अपनी सहनशक्ति में वृद्धि कर सकते हैं। वहीं सुख में सुमिरन करने से हमें आनंद का अनुभव हो सकता है।
नर हो न निराश करो मन को – मैथिली शरण गुप्त की एक कविता की पंक्ति है। इसमें ‘नर’ एवम् ‘निराश’ दो शब्दों पर ध्यान आकर्षित किया गया है। एक और शब्द ‘मन‘ है, निराश होने का संबंध मन से ही है। मन ही निराश होता है, जब उसकी आश पूरी नहीं होती, तो वह
नर हो न निराश करो मन को … Read More »
आए थे हरि भजन को, ओटन लगे कपास – आखिर इस उक्ति में निहित वास्तविक अर्थ को मनुष्य समझ क्यों नहीं पाता। यह जो समझ है, उसमें जागृत कैसे हो सकता है?
आए थे हरि भजन को … Read More »
चौबे गए छब्बे बनने दुबे बनके लौटे- छब्बे बना जा सकता है, आत्मज्ञान को पाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए पाठक बनना होगा, सीखना होगा, जानना होगा। तभी यह संभव है, वर्ना उन्नति संभव नहीं, दुबे बनकर लौटना पड़ेगा।
चौबे गए छब्बे बनने दुबे बनकर लौटे ।। Read More »
जहां चाह वहां राह – बात सही है। पर जहां चाह नहीं है, वहां भी राह है। एक और राह , जो साधारण मनुष्य को दिखाई नहीं देता। और जिसपर चलकर समस्त दुखों से छुटकारा मिल सकता है …
जहां चाह वहां राह ।। Read More »
मन चंगा हो तो करूणा मय हो जाता है, विनम्र हो जाता है। उसमें सभी सद्गुणों का उद्भव हो जाता है, जो पहले से मौजूद होता है।
मन चंगा तो कठौती में गंगा।। Read More »
यहां मैली चादर का आशय मन की गंदगी है। कामना, वासना, लोभ, मोह, क्रोध, अभिमान आदि मनोविकारों के आवरण से मनुष्य का मन धुमिल हो जाता है।
मैली चादर ओढ़ के कैसे … Read More »