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बच्चे मन के सच्चे — Bachche Man Ke Sachche

आज के बच्चे कल के पिता हैं ! बच्चे बहुत प्यारे होते हैं। नटखट होते हैं, पर उनका मन बिल्कुल साफ होता है। इनका मन खाली बर्तन के समान होता है। खाली बर्तनों में जो चाहो भर दो, वैसे ही होता है बच्चों का मन। क्या अच्छा है और क्या बुरा उन्हें इसका ज्ञान नहीं […]

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गुरु की महिमा — Glory of The Guru

‘गुरु’ को परिभाषित करना सरल नहीं है। संत कबीरदास ने कहा है; कि सात समन्दरों के जल को स्याही बना दी जाय, सभी वृक्षों को कलम बना दिया जाय, समुचे धरा को कागज बना दिया जाय तब भी इनकी महिमा को लिखा नहीं जा सकता है। सात समद की मसि करो लेखनी सब बनाई। धरती

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रिश्ते-नाते क्या होते हैं? — What Are Relationships?

रिश्ते समझदारी से बनते हैं ! रिश्ते; अर्थात् व्यक्तियों के बीच आपस में होने वाले लगाव, संबंध या संपर्क। यह व्यक्तियों में होने वाला पारस्परिक संबंध है। यह ऐसा संबंध है जो एक ही कुल में जन्म लेने अथवा विवाह आदि करने से होता है। कुछ रिश्ते व्यक्ति के जन्म लेने के साथ ही बन

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चिंता नहीं चिंतन से होगा समाधान

चिंता नहीं चिंतन करो —

चिंतन मन का केवल कार्य ही नहीं वल्कि धर्म है। चिंतन के पश्चात जो कार्य किया जाता है, उसकी सफलता में संदेह नहीं रहता। अत: किसी भी कार्य को करने से पूर्व चिंतन करना चाहिए। किसी भी समस्या पर हमें चिन्ता नहीं चिंतन करना चाहिए।

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प्रयास का अर्थ क्या है? — What is the Meaning of Effort?

हार-जीत के बीच में एक ही रास्ता है; प्रयास!  साथियों, जीवन में सफलता और असफलता, हार और जीत के बीच में एक ही रास्ता है; वह रास्ता है प्रयास का। प्रयास करना अर्थात् किसी काम को प्राऱभ करना और निरंतर करते रहना जब तक हम उसमें सफल ना हो जाएं।  किसी भी क्षेत्र में जिन्होंने

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अभ्यास का महत्व — Importance of Practice

अभ्यास का अर्थ ! ‘अभ्यास’ अर्थात् बार बार किसी काम को करना। अभ्यास का अर्थ है; एक ही क्रिया को निरंतर दोहराते जाना। और ऐसा तब तक करते जाना जब तक कि आप उस क्रिया मेँ सफल न हो जायेँ। यह कोई शब्द मात्र नहीं है, यह एक निरंतर की जानेवाली क्रिया है। अभ्यासो  न

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Najariya ka arth

नजरिया का अर्थ क्या है …

इस संसार को हम अपने नजरिये से देखते हैं और यह संसार भी हमें हमारे नजरिये के हिसाब से देखता है। जैसा दृष्टिकोण वैसा दृश्य, जैसी सोच वैसी दुनिया …

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क्रोध में क्या करना चाहिए? — What To Do When Angry?

क्रोध एक शक्ति है। क्रोध का होना स्वाभाविक है, कोई मनुष्य ऐसा नहीं, जिसके अन्दर यह ना हो‌। अगर क्रोध ना हो तो आदमी नपुंसक हो जायेगा। जरूरत है अपने क्रोध को जानने की, परन्तु क्या आप अपने इसे जान.पाते हैं ? बिल्कुल नहीं जान पाते, क्योंकि जब आप क्रोध में होते हैं तो पागल

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धर्म क्या है? — What Is Religion?

जब जब धर्म की हानि होती है! श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते है; हे भारत जब जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्वि होती है तब तब ही मैं अपने आप को रचता हूं; अर्थात प्रकट करता हूं। यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्‌ ॥ महाभारत युद्ध के प्रारम्भ होने से

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निराशा में आशा छुपी है —

निराशा एक ऐसी स्थिति है जो निम्न मनोदशा और काम के  प्रति अरूचि को दर्शाता है। अगर ऐसी मनःस्थिति में कोई व्यक्ति लम्बे समय तक उलझा रहे, तो फिर वह अवसाद का शिकार हो सकता है। निराश होने की वजह चाहे कुछ भी हो, निराशा के प्रभाव में आकर उम्मीद नहीं खोना है। निराशा एक

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फितरत का मतलब क्या है — Meaning of Nature

फितरत से कोई अच्छा तो कोई बुरा होता है ! किसी का फितरत उसके सोचने, बोलने और व्यवहार से आंका जाता है। यह व्यक्ति या वस्तु में प्राय: एक जैसा रहने वाला गुण है। बुरे प्रकृति के लोगों में यह कुटिल होने की अवस्था है। वैसे लोग अपने मतलब के लिए गिरगिट के तरह रंग

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