आध्यात्मिकता क्या है… जानिए।

आध्यात्मिकता क्या है? इसे समझने के यह जानना होगा कि अध्यात्म क्या है? क्योंकि आध्यात्मिकता का संबंध अध्यात्म से है। और अध्यात्म एक ऐसा विषय है, जिसे शब्दों से समझाना कठिन है, यह अनुभव का विषय है। आध्यात्मिकता एक मार्ग है, जिसपर चलकर आध्यात्मिक हुवा जा सकता है, अध्यात्म को जाना जा सकता है। यह […]

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होली उत्सव का महत्व।

होली एक प्रसिद्ध भारतीय त्योहार है जो भारत के विभिन्न हिस्सों में मनाया जाता है। यह त्योहार फाल्गुन मास के समापन एवम् चैत्र मास के आरंभ काल में मनाया जाता है। होली का उत्सव सम्पूर्ण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। यह उत्सव फाल्गुन पूर्णिमा और इसके दूसरे दिन मनाया जाता है। यहां तक

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महर्षि अरविंद का जीवन परिचय

महर्षि अरविंद जो अपने युवावस्था में अरविंद घोष के नाम से जाने जाते थे। उनकी रचनाओं और विचारों ने उन्हें एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में स्थापित किया। महर्षि अरविंद का जीवन परिचय समस्त संसार के लोगों के लिए समान रूप से प्रेरणादायक है। उनका जन्म 15 अगस्त 1872 को कोलकाता, भारत में हुआ था।

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सुर्य नमस्कार क्या है जानिए…

सुर्य नमस्कार का शाब्दिक अर्थ है सुर्य को नमस्कार करना। भारतीय संस्कृति में एक दूसरे को अभिवादन करने के लिए नमस्कार का प्रचलन है। सामान्यतः यह एक दुसरे के प्रति आदर एवम् विनम्रता का भाव व्यक्त करने का एक मुद्रा है। गहन अर्थों में प्रत्येक मनुष्य के भीतर एक विशिष्ट ऊर्जा विद्यमान है, जो कि

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प्रभाते कर दर्शनम् …. प्रातःकालीन मंत्र।

प्रभाते कर दर्शनम् – यह एक मंत्र का अंश है, जिसमें तीन शब्द हैं। पहला है प्रभात यानि सुबह की बेला, दुसरा है कर यानि हथेली और तीसरा है दर्शन। यहां दर्शन का आशय देखने से है। सुबह की जो बेला है, हम नींद से जगते हैं। जब हम नींद में होते हैं, हमारी पलकें

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अष्टांगयोग क्या है जानिए

अष्टांगयोग क्या है? इस प्रश्न का समाधान चंद शब्दों अथवा वाक्यों में नहीं किया जा सकता। यह साधना का विषय है, इसके मार्ग पर चलकर ही इस विषय पर समुचित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। शब्द की विवेचना करें तो अष्टांग का आशय हुवा है आठ अंगो वाला। और योग का आशय दो अथवा

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प्राणायाम क्या है जानिए..!

प्राणायाम का शाब्दिक अर्थ है प्राण का नियमन। यह प्राण और आयाम दो शब्दों का मेल है। प्राण वह ऊर्जा है जिसके कारण हमारा जीवन है। वह शक्ति जो हमारे शरीर को, जो एक यंत्र की भांति है, इसे संचालित करता है। इसका संबंध श्वास-प्रश्वास से है, इसी प्रक्रिया के द्वारा प्राण ऊर्जा का प्रत्यक्ष

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अनुलोम विलोम क्या है जानिए…

अनुलोम विलोम श्वास लेने और छोड़ने की एक प्रक्रिया है। सामान्यतः हम नाक के दोनों छिद्रों से सांस लेते और छोड़ते हैं। पर अनुलोम विलोम में नासिका के एक छिद्र से सांस लिया जाता है और दुसरे से छोड़ा जाता है। अनुलोम विलोम एक दुसरे के विपरीत हैं। नासिका के एक छिद्र से सांस लेना

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मूर्खता क्या है जानिए

मूर्खता मूर्ख होने की अवस्था है। इसके मूल में मूल ‘मूर्ख’ शब्द है। बुद्धहीनता इसका समानार्थी शब्द हैं। अर्थात् यह माना जाता है कि मूर्खता में बुद्धि का अभाव होता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में मूर्ख बुद्धिहीन होते हैं? चूंकि यह मन का विषय है, मन का भाव है। अतः

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दृष्टिकोण का अर्थ क्या है जानिए…

दृष्टिकोण हिन्दी भाषा का एक शब्द है। यह जो शब्द है, दृष्टि और कोण दो शब्दों का युग्म है। दृष्टि का आशय देखने की वृति से है, देखने की शक्ति से है। जिन चीजों को देखने की हमारी रुचि होती हैं, वो सबकुछ हमें दिखता है। अगर देखना न चाहें, तो कुछ भी नहीं दिखाई

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निराशा के पल … Moment of despair.

निराशा के पल, अर्थात् वह पल जब कोई निराश होता है। निराशा निराश होने का भाव है, यह आशा के विपरीत की अवस्था है। निराशा का अर्थ है आशा का अभाव। हर कोई सुखी होना चाहता है, सुख की चाहत व्यक्ति को कार्य में प्रवृत्त करता है। और ये कार्य सफलता की आशा के साथ

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