स्वयं की खोज का उद्देश्य —
स्वयं की खोज करने के लिए, कुछ पाने की आकांक्षा को खोना पड़ता है। कुछ खोकर सबकुछ खोज लेना ही इस जीवन का उद्देश्य है।
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स्वयं की खोज करने के लिए, कुछ पाने की आकांक्षा को खोना पड़ता है। कुछ खोकर सबकुछ खोज लेना ही इस जीवन का उद्देश्य है।
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सामान्यतः जब शुन्य शब्द की चर्चा होती है तो मस्तिष्क में एक प्रतीक चिन्ह अंग्रेजी लिपी में ‘0’ एवम् हिन्दी में ‘०’ के रुप में उभरकर सामने आता है। इस चिन्ह का उपयोग गणितीय शास्त्र में किया जाता है। शुन्य (zero) एक अंक है जो आधुनिक गणितीय पद्धतियों में सर्वमान्य प्रतीक है। आधुनिक शुन्य की
जानिए शुन्य क्या है — Learn What Is Zero Read More »
मैं एक तनावमुक्त और हिंसामुक्त समाज चाहता हूं” यह कथन है एक मानवतावादी और आध्यात्मिक नेता का जो आज के समय में श्री श्री रविशंकर के नाम से जाने जाते हैं। 13 मई 1956 को भारत के तमिलनाडु प्रांत में एक विलक्षण गुणों से संपन्न शिशु का जन्म हुआ। बाल्यपन से ही उसमें आध्यात्मिक प्रवृति
श्री श्री रविशंकर के विचार — Thoughts of Sri Sri Ravishankar Read More »
पलायन शब्द का अर्थ क्या है? सामान्यतः एक स्थान अथवा स्थिति से दुसरे स्थान अथवा स्थिति की ओर गमन की क्रिया को पलायन समझा जाता है। इसके व्यक्तिगत, आर्थिक, सामाजिक आदि अनेक कारण होते हैं। इसके सामुहिक रूप भी होते हैं, प्राकृतिक आपदा एवम् युद्ध जैसी परिस्थितियों अथवा रोजी-रोजगार के तलाश में सामुहिक पलायन देखने
पलायन का अर्थ — Meaning of Escape Read More »
सामान्य शब्दों में जन्म से मृत्यु तक की यात्रा ही जीवन यात्रा है। हर कोई यात्रा में है, मनुष्य का जीवन ही जीवन से मृत्यु तक की यात्रा है। इस दरम्यान हर कोई खोज रहा है, कोई विलासिता, मान-सम्मान, धन-संपत्ति में सुख खोज रहा है। कोई शांति के खोज में भटक रहा है। मन्दिर में,
जीवन यात्रा का अर्थ — Meaning of the Journey of Life Read More »
‘स्वयं की यात्रा’ का आशय क्या है? यह प्रश्न विचारणीय है! स्वयं की यात्रा का तात्पर्य है स्वयं की समझ की यात्रा! स्वयं को जानने के लिए यात्रा। इन तीन शब्दों पर गौर किजिए! एक शब्द है स्वयं, दुसरा है समझ और तीसरा है यात्रा। ‘स्वयं की समझ की यात्रा’ पर विचार से पूर्व इन
स्वयं की यात्रा — Journey of Self Read More »
परिवार क्या है! सामान्यतः यह सबको मालुम होता है, परन्तु परिवार का अर्थ क्या है? इसका महत्व क्या है? इसे जानना आवश्यक है। क्योंकि व्यक्ति की सामाजिक मर्यादा बहुत कुछ उसके परिवार से ही निर्धारित होता है। समाज शास्त्र के अनुसार परिवार समाज की एक इकाई है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। मूख्यत: समाज में
परिवार का अर्थ — Meaning of Family Read More »
पिता अर्थात् जन्मदाता, पालनकर्ता एवम् मार्गदर्शक! एक स्त्री संतानोत्पत्ति के लिए जिस पुरुष का सहयोग लेती है, वह जन्म लेने वाले शिशु का पिता कहलाता है। मनुष्य हो अथवा पशु-पक्षी; संतानोत्पत्ति के लिए विपरीत लिंगों का आपस में यौन संपर्क आवश्यक होता है। जानवर भी संतानोत्पत्ति करते हैं, परन्तु मनुष्य और अन्य जन्तुओं में आलोचनात्मक
पिता होने का अर्थ — Meaning of Being a Father Read More »
सामान्य अर्थों में दुसरों के दुःख, कष्ट अथवा हानि के प्रति सहानुभूति के भाव को संवेदना समझा जाता है, यह मन की एक प्रतिक्रिया है। सही अर्थों में संवेदना का अर्थ ज्ञानेन्द्रियों द्वारा प्राप्त ज्ञान अथवा अनुभव से है। जगत में दो प्रकार के पदार्थ उपस्थित हैं, सजीव और निर्जीव। सजीव पदार्थों में प्राण ऊर्जा
जानिए संवेदना क्या है — Learn What Is Sensation Read More »
स्वच्छता का अर्थ होता है; तन, मन और अपने आसपास अवस्थित वस्तुओं की साफ-सफाई। स्वच्छता मनुष्य के भीतर उत्तम गुणों को विकसित करता है। शारीरिक, मानसिक एवम् बौद्धिक हरेक रुप से स्वस्थ रहने के लिए जीवन में स्वच्छता का होना महत्त्वपूर्ण है। केवल मनुष्य ही नहीं बल्कि स्वच्छता या शुद्धि किसी भी चीज की पहचान
स्वच्छता का महत्व — Importance of Cleanliness Read More »
मानवता के उपासक श्री रामकृष्ण को परमहंस की उपाधि दी गई है। हिन्दु धर्म में परमहंस की उपाधि उन्हें दी जाती है, ज़ो योग के अंतिम अवस्था समाधि को प्राप्त कर लेते हैं। श्री रामकृष्ण परमहंस एक ऐसे अद्भुत संत हुवे, जिन्होंने साधना के द्वारा परमत्तत्व का अनुभव किया था। उनके परम शिष्य स्वामी विवेकानंद
रामकृष्ण परमहंस का जीवन परिचय Read More »