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महत्त्वाकांक्षा क्या है जानिए — Learn What Is Ambition

सामान्य शब्दों में महत्त्वाकांक्षा का आशय है महत्व की आकांक्षा। यह महत्व और आकांक्षा दो शब्दों का योग है। महत्व से आशय है बड़ा होने का भाव! बड़ा होने का भाव के अलग-अलग रुप होते हैं। धनाढ्य होने का भाव, शिक्षित होने का भाव, प्रतिष्ठित होने का भाव, सेवा का भाव, नेतृत्व का भाव, उन्नत […]

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धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय — Dheere Dheere Re Mana, Dheere Sab Kuch Hoye

धीरे धीरे रे मना धीरे सबकुछ होय।माली सींचै सौ घड़ा ऋतु आये फल होय।। धैर्य और समय इन दो त्तत्वों का महत्व जीवन में सर्वाधिक है। संत कबीर ने इसी बात को इंगित किया है। कबीर कहते हैं, कि सब काम धीरे-धीरे और समय आने पर ही संपन्न होता है। समय आने पर ही पेड़

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जानिए समाज क्या है — Learn What Is Society

युनानी दार्शनिक अरस्तु ने मनुष्य को  एक सामाजिक प्राणी की संज्ञा दी है। व्यक्ति के विना समाज और समाज के विना व्यक्ति की कल्पना नहीं की जा सकती। सामाजिक होने का आशय है समाज में रहना और समाज के नियमों का पालन करना। व्यक्ति के विना समाज और समाज के विना व्यक्ति की कल्पना नहीं

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Sakal padarath ehi jag mahin

सकल पदारथ एही जग माहीं

प्रकृति के द्वारा इस जगत में विभिन्न प्रकार के संसाधनों की रचना की गई है। परन्तु इन समस्त संसाधनों का उपभोग करने के लिए कर्म करने पड़ते हैं …

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जागरूकता किसे कहते हैं?

जागरूकता और जानकारी में अंतर है। जानकारी अनुभव अथवा शिक्षा से अर्जित किया हुवा तथ्य होता है। जबकि जागरूकता का आशय भीतर के संसार से है।

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कागज की कश्ती, बारिश का पानी …

‘कागज की कश्ती‘ अर्थात् कागज से बना नाव अथवा नाव जैसी आकृति। एक खिलौना, जिससे बच्चे खेलते हैं। एक व्यस्क मन के लिए बेकार की चीज, परन्तु एक बालक के लिए यह मनोरंजन की वस्तु है। एक बालक के मन को गौर से देखें, तो उसकी निर्मलता, निश्छलता अवश्य दिखायी देखी।  एक बालक को तितलियों

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तटस्थ भाव का अर्थ

तटस्थ भाव का अर्थ क्या है ? इसकी व्याख्या करना सरल नहीं है। तटस्थता की सही व्याख्या तथस्थ होकर ही किया जा सकता है। क्योंकि इसका संबंध वास्तविकता से है, सत्य से है ,और सत्य अनुभव का चीज है। सामान्य रुप में निष्पक्ष होने की अवस्था को तटस्थ भाव समझा जाता है। सामान्यतः यह देखा

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पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ — Pothi Padh-Padh Jag Mua

पोथी एक संस्कृत शब्द है, अन्य भाषाओं में इसे पुस्तक, किताब, book आदि नामों से जाना जाता है।  छोटी-छोटी पुस्तकों को पोथी कहा जाता है, जिसके पन्नों में नैतिक, धार्मिक बातों का उल्लेख होता है, यानि ज्ञान की बातें लिखी होती हैं। अपने वृहत स्वरुप में, अर्थात् मोटी-मोटी धार्मिक पुस्तकों को ग्रन्थ, शास्त्र, संहिता आदि

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प्रेम ना बाड़ी ऊपजै — Love Doesn’t Grow In The Garden

प्रेम ना बाड़ी ऊपजै प्रेम ना हाट विकाय। राजा रंक जेही रूचै सीस दिये ले जाय।। कबीर के दोहे दोहे में प्रेम के विषय में जो अभिव्यक्ति है! उसके अनुसार प्रेम कोई वस्तु नहीं है, जिसका पैदावार खेतों, बगीचों में  किया जा सके। और ना ही यह बिकाऊ है, जिसे हाट-बाजार से मोल अथवा उधार

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मोहब्बत क्या है जानिए — Know What Is Love

दोस्तों यह जो मोहब्बत है, यह क्या चीज है? आइए इसे समझने के लिए थोड़ी माथा-पच्ची करते हैं। कुछ शब्द ऐसे होते हैं, जिनका एक सामान्य अर्थ होता है, जो सामान्यतः लोग समझते हैं। और एक मूल अर्थ भी होता है, जो सामान्य व्यक्ति को आसानी से समझ में नहीं आता है। इसे समझने के

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आंखों के आंसु — Tears In Eyes

हजारों तरह के ये होते हैं आंसु , अगर दिल में गम हो तो रोते हैं आंसु। खुशी में भी आंखें भिगोते हैं आंसु ..! इन्हें जान सकता नहीं ये जमाना !  उपरोक्त पंक्तियों में आंसुओं की प्रकृति पर भाव व्यक्त किया गया है। उक्त पंक्तियां गीतकार आनंद वक्शी के एक गीत के अंश हैं।

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